What is Contactor | कॉन्टैक्टर (Contactor) क्या होता है?

कॉन्टैक्टर (Contactor) का परिचय:


कॉन्टैक्टर एक विद्युत स्विच (Electrical Switch) होता है जिसका उपयोग ज्यादा करंट वाले लोड को ON/OFF करने के लिए किया जाता है। इसे हम एक ऑटोमैटिक स्विच भी कह सकते हैं, जिसे छोटा कंट्रोल सिग्नल देकर बड़े पावर सर्किट को नियंत्रित किया जाता है।

आमतौर पर कॉन्टैक्टर का उपयोग मोटर, हीटर, लाइटिंग सिस्टम, पंप और इंडस्ट्रियल मशीनों में किया जाता है।


What is contactor


उदाहरण:

अगर किसी मोटर को सीधे एक छोटे स्विच से चालू किया जाए तो स्विच में ज्यादा करंट जाने से वह खराब हो सकता है। इसलिए कॉन्टैक्टर लगाया जाता है। छोटा स्विच या कंट्रोल सर्किट कॉन्टैक्टर की कॉइल को चलाता है और कॉन्टैक्टर मोटर को सप्लाई देता है।



कॉन्टैक्टर के मुख्य भाग (Parts of Contactor):


1. Coil (कॉइल):

कॉइल कॉन्टैक्टर का मुख्य भाग होती है। जब कॉइल को वोल्टेज दिया जाता है तो इसमें मैग्नेटिक फील्ड बनता है।
जैसे ही कॉइल एक्टिव होती है, यह अंदर लगे मैकेनिज्म को खींचती है और कॉन्टैक्ट की स्थिति बदल जाती है।
कॉइल अलग-अलग वोल्टेज की हो सकती है जैसे:

  1. 24V DC
  2. 110V AC
  3. 230V AC
  4. 440V AC


2. Main Contacts (मुख्य कॉन्टैक्ट):


ये कॉन्टैक्टर के पावर कॉन्टैक्ट होते हैं जिनसे मोटर या अन्य लोड की सप्लाई जाती है।
आमतौर पर टर्मिनल होते हैं:
L1, L2, L3 → Input Supply
T1, T2, T3 → Output to Load
जब कॉन्टैक्टर ON होता है तो ये कॉन्टैक्ट जुड़ जाते हैं और लोड को बिजली मिलती है।


3. Auxiliary Contacts (सहायक कॉन्टैक्ट):


Auxiliary contacts कॉन्टैक्टर के छोटे (सहायक) कॉन्टैक्ट होते हैं जिनका उपयोग कंट्रोल सर्किट के लिए किया जाता है। ये मुख्य पावर को ON/OFF करने के लिए नहीं होते, बल्कि कॉन्टैक्टर की स्थिति की जानकारी देने और कंट्रोल लॉजिक बनाने के लिए उपयोग होते हैं। Main contact मोटर को बिजली देता है, जबकि Auxiliary contact कंट्रोल सर्किट को नियंत्रित करता है।

इनके प्रकार: 

NO (Normally Open) 
NC (Normally Closed)

उपयोग:

Holding circuit बनाने में
Indicator lamp चलाने में
Interlocking में


कॉन्टैक्टर कैसे काम करता है:

जब कॉन्टैक्टर की कॉइल को सप्लाई मिलती है। कॉइल एक चुंबकीय शक्ति (Magnetic Force) बनाती है। यह अंदर लगे Armature को खींचती है। Main contacts बंद हो जाते हैं। पावर सप्लाई मोटर या लोड तक पहुंच जाती है। 


जब कॉइल की सप्लाई बंद कर दी जाती है:

Magnetic force खत्म हो जाती है। Spring वापस कॉन्टैक्ट को अपनी पुरानी स्थिति में ले आती है।
लोड OFF हो जाता है।


कॉन्टैक्टर और रिले में अंतर



कॉन्टैक्टर का उपयोग कहाँ होता है:

  1. मोटर स्टार्टर में
  2. पंप कंट्रोल पैनल में
  3. HVAC सिस्टम में
  4. इंडस्ट्रियल मशीनों में 
  5. ऑटोमेशन सिस्टम में
  6. इलेक्ट्रिक हीटर कंट्रोल में

कॉन्टैक्टर खराब होने के कारण:

  1. कॉन्टैक्ट जल जाना (Contact burning)
  2. कॉइल खराब होना
  3. ज्यादा करंट आना
  4. बार-बार ON/OFF होना
  5. ढीला कनेक्शन
  6. धूल या नमी जमा होना

कॉन्टैक्टर खराब होने के लक्षण:

  1. मोटर स्टार्ट नहीं होना
  2. आवाज आना (Chattering)
  3. कॉन्टैक्ट गर्म होना
  4. स्पार्किंग होना
  5. मोटर बार-बार बंद होना


निष्कर्ष:

कॉन्टैक्टर एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रिकल डिवाइस है जो बड़े पावर लोड को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करता है। यह छोटे कंट्रोल सिग्नल की मदद से बड़ी मोटर या मशीन को ON/OFF करने का काम करता है। इंडस्ट्री और ऑटोमेशन सिस्टम में कॉन्टैक्टर का उपयोग बहुत ज्यादा किया जाता है क्योंकि यह सुरक्षा, सुविधा और विश्वसनीयता प्रदान करता है।

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