ओवरलोड रिले कैसे काम करती है? पूरी जानकारी Step-by-Step
ओवरलोड रिले (Overload Relay) एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक मोटर को ओवरलोड करंट (Overload Current) से बचाने के लिए किया जाता है। जब मोटर अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक करंट लेने लगती है, तो ओवरलोड रिले मोटर को सीधे बंद करने के बजाय कॉन्टैक्टर (Contactor) को ट्रिप कराकर मोटर की सप्लाई बंद करवा देती है। इसे सामान्यतः मोटर स्टार्टर और कॉन्टैक्टर के साथ लगाया जाता है।
ओवरलोड रिले क्यों लगाई जाती है?
यदि मोटर पर जरूरत से ज्यादा लोड आ जाए, मोटर का शाफ्ट जाम हो जाए या किसी मैकेनिकल समस्या के कारण मोटर अधिक करंट लेने लगे, तो मोटर की वाइंडिंग गर्म होने लगती है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर मोटर की वाइंडिंग जल सकती है। ओवरलोड रिले इस स्थिति से मोटर की सुरक्षा करती है।
ओवरलोड रिले के मुख्य Parts और उनके उपयोग
1. Current Sensing Element
यह मोटर द्वारा खींचे जा रहे करंट को महसूस करता है। थर्मल ओवरलोड रिले में इसके लिए हीटिंग एलिमेंट का उपयोग होता है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक ओवरलोड रिले में इलेक्ट्रॉनिक सेंसिंग सर्किट करंट को मापता है।
2. Bimetallic Strip
थर्मल ओवरलोड रिले में Bimetallic Strip एक महत्वपूर्ण भाग होता है। यह दो अलग-अलग धातुओं से बनी पट्टी होती है। अधिक करंट के कारण गर्म होने पर दोनों धातुएँ अलग-अलग मात्रा में फैलती हैं, जिससे बाइमेटलिक स्ट्रिप मुड़ जाती है।
3. Heater Element
हीटर एलिमेंट मोटर के करंट के अनुसार गर्म होता है। जब मोटर निर्धारित करंट से अधिक करंट लेती है, तो हीटर अधिक गर्मी पैदा करता है और बाइमेटलिक स्ट्रिप को गर्म करता है।
4. Trip Mechanism
जब बाइमेटलिक स्ट्रिप पर्याप्त मात्रा में मुड़ जाती है, तो वह ट्रिप मैकेनिज्म को सक्रिय करती है। इसके कारण रिले के Auxiliary Contacts की स्थिति बदल जाती है।
5. Auxiliary Contacts
ओवरलोड रिले में सामान्यतः 95-96 NC (Normally Closed) और 97-98 NO (Normally Open) Auxiliary Contacts होते हैं।
95-96 NC: सामान्य स्थिति में बंद रहता है। ओवरलोड होने पर यह खुल जाता है और कॉन्टैक्टर की Coil की सप्लाई काट देता है।
97-98 NO: सामान्य स्थिति में खुला रहता है। ओवरलोड होने पर यह बंद हो जाता है और इसका उपयोग Trip Indication या Alarm के लिए किया जा सकता है।
6. Current Setting Dial
इस डायल की मदद से ओवरलोड रिले का Current Setting मोटर के Rated Current के अनुसार सेट किया जाता है। सही Setting मोटर की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
7. Reset Button
ट्रिप होने के बाद रिले को Reset करने के लिए Reset Button का उपयोग किया जाता है। कुछ रिले में Manual Reset और Automatic Reset दोनों विकल्प मिलते हैं।
ओवरलोड रिले Step-by-Step कैसे काम करती है?
मान लीजिए किसी मोटर का Rated Current 10 Ampere है।
Step 1: मोटर सामान्य स्थिति में लगभग अपने निर्धारित करंट पर चलती है। ओवरलोड रिले सामान्य स्थिति में रहती है।
Step 2: मोटर पर अचानक अधिक Mechanical Load आ जाता है।
Step 3: मोटर अधिक करंट लेने लगती है, उदाहरण के लिए करंट 10 Ampere से बढ़कर 15 Ampere हो जाता है।
Step 4: यह अधिक करंट ओवरलोड रिले के Sensing Element या Heater Element से गुजरता है।
Step 5: Heater अधिक गर्म होता है और Bimetallic Strip को गर्म करता है।
Step 6: Bimetallic Strip गर्म होकर मुड़ती है और Trip Mechanism को सक्रिय करती है।
Step 7: 95-96 NC Contact खुल जाता है।
Step 8: Contactor की Coil की सप्लाई बंद हो जाती है और Contactor Main Contacts को खोल देता है।
Step 9: मोटर की Power Supply कट जाती है और मोटर बंद हो जाती है।
इस तरह ओवरलोड रिले मोटर को लंबे समय तक अत्यधिक करंट लेने से बचाती है।
Overload Relay और Short Circuit Protection में अंतर
ओवरलोड रिले मुख्य रूप से Overload Condition से मोटर की सुरक्षा करती है। लेकिन Short Circuit से सुरक्षा के लिए सामान्यतः MCB (Miniature Circuit Breaker), MCCB (Moulded Case Circuit Breaker) या Fuse जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
इसलिए मोटर के सुरक्षा सिस्टम में सामान्यतः MCB/MCCB + Contactor + Overload Relay का संयोजन देखने को मिलता है।
निष्कर्ष
ओवरलोड रिले मोटर सुरक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मोटर के करंट को लगातार मॉनिटर करती है और जब मोटर निर्धारित सीमा से अधिक करंट लेने लगती है, तो उचित समय के बाद ट्रिप होकर कॉन्टैक्टर के माध्यम से मोटर को बंद कर देती है। सही Current Setting, सही Reset Mode और उचित Overload Relay का चयन मोटर की सुरक्षित और विश्वसनीय कार्यप्रणाली के लिए बहुत जरूरी है।

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